New President Of India 2025:भारत के नए उपराष्ट्रपति C P राधाकृष्णन वोटों की जंग में जबरदस्त जीत की कहानी

1/5 - (1 vote)

New President Of India 2025: नमस्कार दोस्तों! भारत की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ चुका है। NDA उम्मीदवार और महाराष्ट्र के गवर्नर चंद्रपुरम पोनुसामी राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) अब भारत के नए उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने I.N.D.I.A. गठबंधन के उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराकर यह जीत हासिल की। यह चुनाव बेहद शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से हुआ, जिसमें सांसदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राधाकृष्णन न केवल एक अनुभवी राजनेता हैं बल्कि अपने साफ-सुथरे और ईमानदार राजनीतिक जीवन के लिए भी जाने जाते हैं। आइए जानते हैं इस पूरे चुनाव और उनकी जीवन यात्रा के बारे में विस्तार से।

उपराष्ट्रपति चुनाव का नतीजा

नए उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में NDA उम्मीदवार C.P. राधाकृष्णन ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों के अंतर से हराया। कुल 781 सांसदों में से 767 ने मतदान किया था। इनमें से 752 वोट मान्य पाए गए जबकि 15 वोट अमान्य घोषित किए गए। यह परिणाम NDA के लिए बड़ी राजनीतिक जीत मानी जा रही है। संसद में इस जीत का व्यापक असर देखने को मिलेगा, क्योंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं और सदन के संचालन में उनकी अहम भूमिका होती है।

चुनाव प्रक्रिया और मतदान का विवरण

उपराष्ट्रपति चुनाव एकदम पारदर्शी और शांतिपूर्ण माहौल में हुआ। मतदान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले वोट डालने पहुंचे। उनके अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कई वरिष्ठ नेताओं ने मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपाध्यक्ष हरिवंश और अन्य दलों के बड़े नेताओं ने भी हिस्सा लिया। विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार और अखिलेश यादव जैसे चेहरे वोट डालते नज़र आए।

पूर्व उपराष्ट्रपति का इस्तीफ़ा

यह चुनाव उस समय हुआ जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा दे दिया था। उनके इस्तीफ़े के बाद यह पद रिक्त हो गया और चुनाव की घोषणा की गई। धनखड़ ने अपने कार्यकाल में संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में अहम योगदान दिया था। उनके अचानक हटने से उपराष्ट्रपति पद पर नई नियुक्ति बेहद आवश्यक हो गई थी। राधाकृष्णन के चयन से उम्मीद की जा रही है कि वे राज्यसभा में अनुशासन और संतुलन बनाए रखेंगे और भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा को और मजबूत करेंगे।

राधाकृष्णन की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत

चंद्रपुरम पोनुसामी राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर में हुआ था। छात्र जीवन से ही उनका झुकाव राजनीति की ओर था और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ से सक्रिय रूप से जुड़े। उन्होंने अपनी राजनीति को हमेशा समाज सेवा का माध्यम बनाया। जनता के बीच उनकी छवि एक सरल और ईमानदार नेता की है। यही कारण है कि वे जल्द ही पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। उनकी राजनीति हमेशा मुद्दा-आधारित रही है और उन्होंने सामाजिक उत्थान को सबसे ऊपर रखा है।

लोकसभा सांसद के रूप में भूमिका

C.P. राधाकृष्णन ने तमिलनाडु के कोयंबटूर से दो बार लोकसभा का चुनाव जीता। सांसद रहते हुए उन्होंने औद्योगिक विकास, कृषि सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में अहम पहल की। वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को संसद में जोर-शोर से उठाने के लिए जाने जाते थे। जनता के बीच उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें ईमानदारी और सेवा भाव का प्रतीक माना जाता है। सांसद के तौर पर उन्होंने जो कार्य किए, वही उनके राजनीतिक करियर की मजबूत नींव बने और उन्हें राष्ट्रीय राजनीति तक ले गए।

राज्यपाल के रूप में अनुभव

राधाकृष्णन ने अपने राजनीतिक जीवन में कई संवैधानिक पदों पर कार्य किया है। वे झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को पारदर्शी बनाने और जनता से सीधे जुड़ने पर जोर दिया। एक राज्यपाल के तौर पर उनकी छवि हमेशा संतुलित और निष्पक्ष रही। यही कारण है कि उन्हें राजनीतिक दलों के बीच भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। राज्यपाल के तौर पर मिले इस अनुभव ने उन्हें और परिपक्व बनाया और उपराष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार साबित किया।

व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर पृष्ठभूमि

C.P. राधाकृष्णन पेशे से एक कृषक और उद्योगपति भी हैं। वे खेती-बाड़ी और औद्योगिक विकास दोनों क्षेत्रों से जुड़े रहे हैं। उनका जीवन हमेशा सादगी और पारदर्शिता का प्रतीक रहा है। परिवार और सामाजिक जीवन में भी वे अपने ईमानदार स्वभाव और नैतिक मूल्यों के लिए पहचाने जाते हैं। जनता के बीच वे एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं जो निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हैं। उनकी यही साफ-सुथरी छवि उन्हें राजनीति में विशेष स्थान दिलाती है।

उपराष्ट्रपति पद पर उनकी भूमिका

भारत के नए उपराष्ट्रपति बनने के बाद राधाकृष्णन पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से चलाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। संसद में बहस को संतुलित रखना और सभी दलों को समान अवसर देना उनकी भूमिका का अहम हिस्सा होगा। उनकी राजनीतिक समझ और अनुभव निश्चित तौर पर इस जिम्मेदारी को निभाने में मददगार साबित होंगे। भारतीय लोकतंत्र में यह पद बेहद महत्वपूर्ण है और राधाकृष्णन से उम्मीदें भी उतनी ही बड़ी हैं।

विपक्ष पर असर और भविष्य की राजनीति

राधाकृष्णन की जीत ने जहां NDA का मनोबल बढ़ाया है, वहीं विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. को बड़ा झटका लगा है। पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी के बावजूद विपक्ष इस चुनाव में संख्या बल की कमी से जूझ गया। यह जीत साफ दिखाती है कि संसद में NDA की पकड़ कितनी मजबूत है। आने वाले समय में यह परिणाम कई राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। राधाकृष्णन की मौजूदगी राज्यसभा में NDA की रणनीतियों को और मजबूती देगी और विपक्ष को अपने कदम नए सिरे से सोचने पर मजबूर करेगी।

निष्कर्ष – एक नया अध्याय

C.P. राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति चुना जाना भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है। उनकी ईमानदारी, अनुभव और जनसेवा की भावना उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है। एक छात्र नेता से लेकर राज्यपाल और अब उपराष्ट्रपति बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। भारत की जनता और राजनीतिक वर्ग दोनों ही उनसे बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। उम्मीद है कि वे राज्यसभा को सुचारू रूप से चलाने और लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने में सफल होंगे। यह चुनाव भारतीय राजनीति में स्थिरता और परिपक्वता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

Read More: अभ्यर्थियों के लिए चलेंगी स्पेशल ट्रेनें, जानें पूरा टाइमटेबल और सुविधाएं

Leave a Comment