India vs South Africa Final: नमस्कार दोस्तों! आज पूरा भारत झूम उठा है क्योंकि हमारी शेरनियों ने इतिहास रच दिया है। Women’s World Cup 2025 के फाइनल में भारत ने South Africa को 53 रनों से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत ने हर भारतीय के दिल में गर्व और जोश भर दिया है। आइए जानते हैं मैच की पूरी कहानी तड़केदार अंदाज़ में!
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शुभमन अंदाज़ में चमकीं स्मृति मंधाना ठोके 45 रनों की दमदार शुरुआत!
फाइनल के इस बड़े मुकाबले में भारत की शुरुआत थोड़ी धीमी जरूर रही, लेकिन स्मृति मंधाना ने अपने क्लासिक कवर ड्राइव्स और टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने 58 गेंदों में 45 रन बनाए, जिसमें 8 बेहतरीन चौके शामिल थे। भले ही वह बड़ा स्कोर नहीं बना सकीं, लेकिन उनकी साझेदारी ने शुरुआती झटका लगने से टीम को बचा लिया।
मंधाना ने नई गेंद का शानदार सामना किया और पावरप्ले में रन बटोरते हुए टीम को मजबूत नींव दी। जैसे ही वो सेट हो रही थीं, क्लोए ट्रायन की गेंद पर शॉट खेलने के चक्कर में कैच आउट हो गईं। हालांकि, उनकी यह पारी भारत को 50वें ओवर तक टिके रहने की प्रेरणा बन गई। मंधाना ने साबित कर दिया कि अनुभव के साथ संयम कितना जरूरी होता है!
शेफाली वर्मा का ताबड़तोड़ तूफान 87 रनों की लाजवाब पारी से हिला दी साउथ अफ्रीका की नींव!
जहां एक ओर मंधाना ने संभलकर खेला, वहीं शेफाली वर्मा ने मैदान को रणभूमि बना दिया। उन्होंने मात्र 78 गेंदों में 87 रन ठोक डाले, जिनमें 7 चौके और 2 छक्के शामिल थे। शेफाली के हर शॉट में आक्रामकता झलक रही थी — कट, पुल, ड्राइव सबकुछ कमाल का! उन्होंने हर दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज़ को निशाने पर लिया और स्कोरबोर्ड को तेज़ी से आगे बढ़ाया।
जब भी रन रुकते नज़र आए, शेफाली ने स्ट्राइक रोटेट कर गेम को कंट्रोल में रखा। हालांकि, वे खाका की गेंद पर शानदार कैच थमा बैठीं, लेकिन तब तक भारत 150 रन के पार पहुंच चुका था। उनकी यह पारी भारत की जीत की नींव रख गई। सच कहा जाए तो शेफाली ने “फाइनल” को अपने नाम कर दिया!
जेमिमा, हरमन और दीप्ति मिडल ऑर्डर की मज़बूत दीवार बनीं!
शुरुआती विस्फोटक पारी के बाद मिडल ऑर्डर की ज़िम्मेदारी थी स्कोर को बड़ा बनाना — और यह काम शानदार ढंग से किया जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने। जेमिमा ने 24 रन बनाए, लेकिन उनकी पारी में स्थिरता थी। कप्तान हरमनप्रीत ने 20 रन जोड़ते हुए टीम को नियंत्रित रखा। लेकिन शो की स्टार रहीं दीप्ति शर्मा, जिन्होंने 58 गेंदों में नाबाद 58 रनों की क्लासिक पारी खेली।
एक छक्का और तीन चौकों के साथ उन्होंने खेल का रुख बदल दिया। जब टीम को जरूरत थी, दीप्ति ने स्ट्राइक रोटेट करते हुए रन बनाए और टीम को 300 के करीब पहुँचाया। इस साझेदारी ने भारत को फाइनल में जीत की ओर अग्रसर किया और दर्शाया कि भारत का मिडल ऑर्डर अब दुनिया का सबसे भरोसेमंद यूनिट बन चुका है!
ऋचा घोष का धमाका आख़िरी ओवरों में छक्कों की बारिश, स्कोर 298 तक पहुंचा!
जब लगा कि भारत 270 के आसपास सिमट जाएगा, तब विकेटकीपर ऋचा घोष मैदान पर उतरीं और मैच की तस्वीर पलट दी। उन्होंने सिर्फ 24 गेंदों में 34 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, जिसमें 3 चौके और 2 छक्के शामिल थे। ऋचा की बल्लेबाज़ी में “निडर क्रिकेट” की झलक दिखी — वो गेंदबाज़ के नाम पर नहीं, सिर्फ बॉल पर फोकस कर रही थीं।
आख़िरी 5 ओवरों में उन्होंने रनरेट को 6 से सीधा 8 के पार पहुंचा दिया। उनकी वजह से भारत 50 ओवर में 298 रनों के मजबूत स्कोर तक पहुँचा। साउथ अफ्रीका के गेंदबाज चारों खाने चित दिखे। ऋचा की पारी ने न सिर्फ फिनिशिंग टच दिया, बल्कि दर्शकों में रोमांच भर दिया। ये वही “फिनिशर स्टाइल” था जो बड़े मैचों में ही देखने को मिलता है!
लौरा वूलवार्ड का शतक भी बेअसर भारत की गेंदबाजी के आगे झुकी साउथ अफ्रीका की शेरनियां
साउथ अफ्रीका की कप्तान लौरा वूलवार्ड्ट ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 98 गेंदों में 101 रनों का शतक पूरा किया, लेकिन बाकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों के आगे टिक नहीं सके। शुरुआत में वूलवार्ड्ट और ब्रिट्स ने संभलकर खेला, लेकिन जैसे ही अमनजोत कौर की डायरेक्ट थ्रो ने ब्रिट्स को रनआउट किया, खेल का रुख बदल गया।
उसके बाद भारतीय स्पिनरों ने पिच पर जादू बिखेर दिया। भले ही वूलवार्ड्ट ने चौकों की बारिश की, मगर दीप्ति शर्मा की जादुई गेंद पर वे कैच आउट हो गईं। उनके आउट होते ही साउथ अफ्रीका की उम्मीदें भी ढह गईं। भारत की टीम ने रणनीतिक गेंदबाज़ी और शानदार फील्डिंग से खेल को अपने कंट्रोल में रखा। वूलवार्ड्ट का शतक इतिहास के पन्नों में रह जाएगा — पर जीत की इबारत भारत ने लिखी! 🇮🇳
दीप्ति शर्मा का जादू 5 विकेट लेकर साउथ अफ्रीका की कमर तोड़ दी!
इस फाइनल की असली हीरो रहीं दीप्ति शर्मा, जिन्होंने गेंदबाजी में कमाल कर दिया। उन्होंने अपने 9.3 ओवरों में सिर्फ 39 रन देकर 5 विकेट झटके, और साउथ अफ्रीकी बल्लेबाजों को सांस लेने तक का मौका नहीं दिया। दीप्ति ने पहले मिडल ऑर्डर में तगड़ा झटका दिया, फिर लोअर ऑर्डर को समेटते हुए साउथ अफ्रीका की उम्मीदें खत्म कर दीं।
उनके स्पिन में वो टर्न था जिसने बल्लेबाजों को बार-बार धोखा दिया। खासकर ट्रायन और डेरक्सन के विकेट ने भारत को मैच पर पूरी पकड़ दिला दी। दीप्ति का यह प्रदर्शन अब विश्व कप इतिहास का हिस्सा बन गया है — उन्होंने साबित कर दिया कि भारत के पास दुनिया की सबसे खतरनाक स्पिन अटैक है। स्टेडियम “दीप्ति-दीप्ति” के नारों से गूंज उठा!
शेफाली वर्मा ने बल्ले के बाद गेंद से भी दिखाया जलवा!
अगर किसी ने इस फाइनल में “दोहरी भूमिका” से चमक बिखेरी, तो वो थीं शेफाली वर्मा। पहले बल्ले से 87 रनों की तूफानी पारी खेलने के बाद, उन्होंने गेंद से भी कमाल किया। शेफाली ने 7 ओवर में सिर्फ 36 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट झटके — सने लुस और मारिज़ाने कैप जैसी अनुभवी बल्लेबाजों को आउट करके साउथ अफ्रीका की रीढ़ ही तोड़ दी।
उनकी आक्रामक गेंदबाज़ी और आत्मविश्वास से भरी अप्रोच ने टीम के बाकी गेंदबाजों को भी प्रेरित किया। शेफाली के स्पिन और लाइन-लेंथ ने यह दिखा दिया कि वह सिर्फ एक हिटर नहीं, बल्कि मैच विनर ऑलराउंडर हैं। उनके हर विकेट के साथ भारतीय फैंस में जोश दोगुना हो गया। कहा जा सकता है – इस फाइनल का हर कोना शेफाली के नाम रहा!
भारत बना विश्व चैंपियन 25 साल बाद नई सुबह, नया इतिहास!
जब दीप्ति शर्मा ने आखिरी विकेट गिराया, पूरा स्टेडियम गूंज उठा – “भारत चैंपियन बना!” 🇮🇳
साउथ अफ्रीका की टीम 45.3 ओवर में 245 रन पर ऑल आउट हो गई, और भारत ने फाइनल 53 रनों से जीतकर इतिहास रच दिया। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि 25 सालों के लंबे इंतजार का अंत थी। हरमनप्रीत कौर ने कप उठाते हुए कहा – “ये जीत हर उस लड़की के नाम है, जिसने क्रिकेट का सपना देखा!”
पूरी टीम ने मिलकर दिखाया कि जज़्बा, एकता और मेहनत से कुछ भी नामुमकिन नहीं। भारत की बेटियों ने इस फाइनल में जो जोश दिखाया, उसने पूरी दुनिया को झुका दिया। अब पूरा देश कह रहा है — “Women in Blue – World Champions 2025!”