SSC Exam Scandal 2025: SSC पेपर का तमाशा! व्यापम घोटाले वाली कंपनी के अजब-गजब सवाल, छात्रों के सपनों से खिलवाड़

Rate this post

SSC Exam Scandal 2025: नमस्कार दोस्तों!अगर आप एक छात्र हैं या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके भविष्य से सीधे जुड़ी है। SSC जैसी बड़ी परीक्षा में व्यापम घोटाले वाली कंपनी को जिम्मेदारी देकर छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया गया है। ऐसे बेहूदा सवाल पेपर में देखकर हर मेहनती छात्र का खून खौल उठेगा। आपके हित और करियर की सच्चाई जानने के लिए इस रिपोर्ट को अंत तक ज़रूर पढ़ें, क्योंकि यहां हम आपको पूरा मामला बिना किसी लाग-लपेट के बताने वाले हैं।

व्यापम घोटाले वाली कंपनी को SSC की जिम्मेदारी क्यों?

भला सोचिए, जिस कंपनी का नाम पहले से व्यापम घोटाले में काला हो चुका है, उसी को SSC जैसे देश के सबसे बड़े एग्जाम का जिम्मा सौंप दिया गया। लाखों युवाओं की मेहनत और भविष्य का खेल ऐसे हाथों में देना किसी राष्ट्रीय मजाक से कम नहीं। मनीष सिसोदिया ने इस फैसले को “छात्रों के साथ धोखा” कहा है। सवाल उठता है – क्या सरकार को यह पता नहीं था, या फिर जान-बूझकर ऐसा किया गया? जब पहले ही भ्रष्टाचार का इतिहास साफ दिख रहा है, फिर ऐसे ठेके का क्या मतलब? यह निर्णय केवल उम्मीदवारों के भरोसे को नहीं तोड़ता, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

2सवाल या कॉमेडी शो? पूरब से पश्चिम और बिल्ली-कुत्ता का खेल

परीक्षा में पूछे गए एक सवाल ने तो सबको हंसी और गुस्से के बीच डाल दिया। सवाल था – “एक आदमी पूरब की ओर मुंह करके खड़ा है, 10 मीटर चलता है, फिर दाईं ओर 10 मीटर चलता है, तो वह किस दिशा में होगा?” जवाब के ऑप्शन में क्या होना चाहिए? पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण। लेकिन यहां आया ट्विस्ट – ऑप्शन थे “सभी बिल्ली कुत्ते हैं”, “कुछ कुत्ते बिल्ली हैं” जैसी बेहूदी बातें! अब सोचिए, पढ़ाई में पसीना बहाने वाले छात्र इस बिल्ली-कुत्ता मिक्सचर को देखकर क्या महसूस करेंगे? यह मजाक नहीं तो और क्या है?

संविधान के सवाल में गैसों का धमाका

दूसरा उदाहरण तो और भी चौकाने वाला है। सवाल था – “संविधान का कौन सा अनुच्छेद भाषण की स्वतंत्रता के अधिकार की बात करता है?” उसके अनुसार सही चयन क्या होना चाहिए था जवाब के सवाल में अनुच्छेद 19 और 21 आदि होने के बजाय वहां पर बच्चों को ऑप्शन में क्या मिलता है ऑक्सीजन ,नाइट्रोजन कार्बन डाइऑक्साइड,। यह देखकर कोई भी अपना सिर पकड़ ले। यह तो ऐसा है जैसे डॉक्टर के एग्जाम में पूछा जाए – ‘हृदय कहां होता है?’ और ऑप्शन दिए जाएं – ब्रेड, मक्खन, पिज्जा, बर्गर। इस तरह के सवाल न सिर्फ छात्रों का मजाक उड़ाते हैं, बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हैं।

परीक्षा बनाने वालों की योग्यता पर सवाल

जब ऐसे सवाल पेपर में आते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है – आखिर ये पेपर बनाने वाले कौन हैं? क्या इन्हें देश के संविधान और बेसिक ज्ञान की समझ नहीं? मनीष सिसोदिया ने तंज कसते हुए कहा – “ये लोग किस ग्रह से आए हैं?” सच कहें तो ऐसे पेपर देखकर लगता है मानो यह कोई बच्चों का जोक बुक क्विज हो। अगर ऐसे ‘एक्सपर्ट’ हमारे सरकारी एग्जाम तैयार करेंगे, तो फिर लाखों युवाओं के सपनों का क्या होगा? जिम्मेदारी और पारदर्शिता दोनों ही गायब हैं।

छात्रों के सपनों के साथ खेल

SSC जैसे एग्जाम से लाखों युवा अपनी सरकारी नौकरी की उम्मीदें जोड़ते हैं। हर दिन की मेहनत, कोचिंग, किताबों और त्याग का फल उन्हें इस परीक्षा से मिलना चाहिए। लेकिन जब पेपर में कुत्ता बिल्ली और नाइट्रोजन ऑक्सीजन जैसे प्रश्नों के उत्तर ऑप्शन में दिखाई देते हैं तो हर किसी बच्चे का मनोबल टूट जाता है या सिर्फ पेपर की बात नहीं है बल्कि इसमें ऐसे तमाम कितनी छात्राएं हैं

जिनकी भविष्य की हत्या की जा रही है ऐसे सवाल उठता है कि बच्चे इतनी मेहनत तैयारी कर रहे हैं बाद में उनके साथ ऐसा हो रहा है तो इसके जिम्मेदार कौन हो सकता है । ऐसे सवालों से उम्मीदवार हताश होते हैं और उन पर मानसिक दबाव बढ़ता है। जिम्मेदार संस्थानों को तुरंत जवाबदेह बनाना होगा, वरना यह लापरवाही एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर सकती है।

राजनीतिक कनेक्शन पर उठते सवाल

सिसोदिया ने साफ इशारा किया कि इस कंपनी के ‘बड़े राजनीतिक कनेक्शन’ हैं, तभी इसे इतने बड़े स्तर का ठेका दिया गया। यह मामला सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सत्ता और ठेकेदारी के गहरे रिश्तों की ओर इशारा करता है। अगर कंपनियों को उनके पुराने घोटालों के बावजूद ऐसे काम मिलते रहेंगे, तो साफ है कि योग्यता नहीं, बल्कि रसूख ही असली पासपोर्ट है। ऐसे में पारदर्शिता और निष्पक्षता का क्या होगा? युवाओं को अब यह समझना होगा कि उनकी लड़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि सिस्टम को ठीक करने की भी है।

सरकार की चुप्पी—सबसे बड़ा सवाल

इतने बड़े घोटाले जैसे हालात सामने आने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। न जांच का ऐलान, न जिम्मेदारों पर कार्रवाई। यह चुप्पी कहीं न कहीं गुनाह में साझेदारी का संकेत देती है। जब छात्रों की मेहनत और देश की प्रतिष्ठा दांव पर हो, तब चुप रहना सबसे बड़ा अपराध है। अब समय आ गया है कि इस मामले में न्यायिक जांच हो और दोषियों को सख्त सजा मिले। वरना कल को ऐसे और भी पेपर देशभर में हंसी का तमाशा बन जाएंगे।

Read More: लोकतंत्र पर डाका महादेवपुरा में 1 लाख फर्जी वोटर का खुलासा राहुल गांधी का बड़ा आरोप

Leave a Comment